बिलासपुर नगर में आप्रवासी जनसंख्या की आर्थिक सहभागिता

 

शुचिता बघेल

संविदा सहायक प्राध्यापक (भूगोल), पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)

 

संक्षेपिका

प्रस्तुत अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य बिलासपुर नगर में आप्रवासियों के प्रवास प्रतिरूप एवं उनकी आर्थिक सहभागिता का भौगोलिक विश्लेशण करना है। यह अध्ययन प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित है। बिलासपुर नगर 55 वार्डों में विभक्त है। यादृच्छिक निदर्शन विधि द्वारा कुल 55 वार्डों में 25 वार्ड का चयन कर 10ः परिवारों का वर्श 2006 में व्यक्तिगत सर्वेक्षण किया गया। बिलासपुर नगर से 2192 परिवारों से अनुसूची के माध्यम से प्रवास संबंधी एवं सामाजिक-आर्थिक संबंधी जानकारी प्राप्त की गई। चयनित परिवारों की कुल जनसंख्या 11005 व्यक्ति है। इनमें से 51.06ः व्यक्ति आप्रवासी है। आप्रवासी व्यक्तियों में 52.57ः महिला आप्रवासी है। आप्रवासी व्यक्तियों में सबसे अधिक संख्या (35.95ः) 30-40 आयु वर्ग में है। आप्रवासी व्यक्तियों में 14.04ः अनु. जाति, 10.04ः अनु. जनजाति एवं 30.20ः व्यक्ति अन्य पिछड़ा वर्ग से है। आप्रवासियों में 85.58ः हिन्दु एवं 7.17ः मुस्लिम धर्म से है। नगर में कुल आप्रवासी व्यक्तियों में 90.48ः व्यक्ति साक्षर है।

 

कुल आप्रवासी व्यक्तियों में 45.18ः व्यक्ति क्रियाशील है। क्रियाशील व्यक्तियों में 78.85ः पुरूश है। क्रियाशील व्यक्तियों में 35.53ः व्यक्ति शासकीय सेवा में, 16.11ः व्यक्ति व्यापार में, 13.28ः व्यक्ति निजी संस्था में, 11.31ः व्यक्ति मजदूरी में सेवारत है, जबकि शेष 23.82ः व्यक्ति अन्य कार्यों में संलग्न है।

 

नगर में कुल कार्यशील आप्रवासियों में सबसे अधिक सहभागिता 30-44 आयु वर्ग में 43.64ः है, जबकि लिंगानुसार कुल क्रियाशील आप्रवासियों में पुरूशों की सहभागिता (78.85ः) महिलाओं (21.51ः) से तीन गुना अधिक है।

 

कार्यशील आप्रवासियों में 23.48ः व्यक्ति रू. 5,000 से कम मासिक आय प्राप्त करते हैं, जबकि रू. 1000 से अधिक मासिक आय प्राप्त करने वाले आप्रवासी व्यक्तियों का प्रतिशत 48.32 है। नगर में जनसंख्या के क्षेत्रीय विश्लेशण हेतु जनांकिकी मे आर्थिक दृश्टि से सक्रिय जनसंख्या के मापन की प्रमुख विधियों के द्वारा आप्रवासियों का आर्थिक क्रियाशीलता का मापन किया गया है।

 

मानव प्रगतिपथ गामी है। प्रगति या विकास के अवसर की तलाश मानव समुदाय को हमेशा से रहा है, और किसी भौगोलिक परिस्थिति में बदलाव से ऐसे अवसर निकल आते हैं। ऐसी ही परिस्थिति में परिवर्तन किसी जनसंख्या को स्थानांतरण हेतु उत्प्रेरित करता है। जनसंख्या स्थानांतरण का ऐसा अवसर विस्थापन हो सकता है, तो अन्य अवसर प्रवास भी हो सकता है। विस्थापन किसी क्षेत्र विशेष में कभी सोद्ेश्य होता है तो कभी अनचाहे-अनजाने निरूद्देश्य जैसेः प्रकृति के प्रकोप से या फिर मानवीय अहंमन्यतता की तुश्टि हेतु निरर्थक थोपे गए युद्ध या फिर अन्योन्य कारण से। कहने का आशय यह है, कि विस्थापन जिसमें जनसंख्या प्रवाह अनिवार्य हो जाता है, वह बाह्य कारणों पर ही निर्भर रहता है।

 

लेकिन प्रवास स्वयं में व्यक्ति या किसी समुदाय का अपने विकास की आशा में आंतरिक कारक के रूप में जनसंख्या प्रवाह का वजह बन जाता है, और ऐसी दशा में किसी क्षेत्र की जनसंख्या के भौगोलिक विश्लेशण में प्रवास का अध्ययन महत्वपूर्ण हो जाता है।

 

उद्देश्य

बिलासपुर नगर छźाीसगढ़ राज्य का एक प्रमुख यातायात नगर है, इस नगर के विकास का श्रेय द. पूर्वी मध्य रेलवे जोन का है। यातायात नगर होने के साथ-साथ यह नगर शैक्षणिक, व्यापारिक, प्रशासनिक व औद्योगिक नगर के रूप में भी विकसित हुआ है। जिससे रोजगार की उपलब्धता ने आप्रवासियों केा इस नगर की ओर आर्कशित किया है।  अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य आप्रवासियों के प्रवासप्रतिरूप व आर्थिक संरचना की विवेचना करना, आप्रवासियों की आर्थिक क्रियाशीलता का मापन करना एवं आप्रवासियों की कार्यिक संरचना व वर्तमान आय स्तर का अध्ययन करना है।

 

इसके अलावा आप्रवासियों की आर्थिक समस्याओं को विश्लेशण कर उनके निराकरण हेतु सुझाव प्रस्तुत करना है।

 

शोध परिकल्पना

(1)  प्रवास लिंगपरक होता है जिसमें महिलाओं की संख्या अधिक होती है।

(2)  आप्रवासियों में क्रियाशील जनसंख्या की अधिकता होती है, जिसमें युवा-वर्ग की प्रधानता होती है।

(3)  प्रवासियों की आर्थिक एवं आय संरचना पर आयु, लिंग, जाति, वैवाहिक स्थिति व शिक्षा का विशेश प्रभाव पड़ता है।

(4)  आप्रवासी पुरूशों की गतिशीलता जहां रोजगार परक होती है, वहीं महिलाओं की गतिशीलता पर वैवाहिक व पारिवारिक कारक अधिक महत्वपूर्ण होते हंै।

 

विधितंत्र

प्रस्तुत अध्ययन मुख्यतः प्राथमिक आंकड़ो पर आधारित है। आप्रवास संबंधित आंकड़ो का संकलन बिलासपुर नगर के 55 वार्ड में से यादृच्छिक विधि द्वारा 25 वार्डों का चयन किया गया है। प्रत्येक वार्ड के 10ः परिवारों का स्तरीकृत विधिद्वारा चयन कर अध्ययन किया गया है। प्रतिदर्श आप्रवासी परिवारों की आर्थिक एवं प्रवास संबंधित जानकारी साक्षात्कार एवं अनुसूची द्वारा प्राप्त की गयी है। इस प्रकार नगर के चयनित वार्ड से 2190 अनुसूची भरी गई है।

 

सर्वेक्षित वार्डों के चयनित परिवारों से आप्रवासी व्यक्त्यिों की गणना मूल निवास स्थान (जन्म स्थान) पर आधारित है।

 

चयनित परिवारों से आप्रवासी व्यक्तियों की आर्थिक क्रियाशीलता का मापन अपरिश्कृत क्रियाशील दर (ब्तनकम ।बजपअपजल त्ंजम), सामान्य क्रियाशील दर (ळमदतंस ।बजपअपजल त्ंजम), आयु विशिष्ट क्रियाशील दर (।हम ैचमबपपिब ।बजपअपजल त्ंजम), जाति विशिष्ट क्रियाशील दर (ब्ंेजम ेचमबपपिब ।बजपअपजल त्ंजम) तथा निर्भरता अनुपात (क्मचमदकमदबल त्ंजपव) के आधार किया गया है।

 

अध्यययन क्षेत्र

बिलासपुर नगर 22ह्05’ źारी अक्षांश एवं 82ह्25’ पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है। राज्य का प्रमुख रेलवे परिक्षेत्र विकसित होने के कारण यह नगर प्रमुख यातायात नगर है। इसकी समुद्री सतह से औसत ऊँचाई 285 मीटर है। नगर का क्षेत्रफल 45.43 वर्ग कि.मी. है। इस नगर से देश के प्रमुख राजमार्ग गुजरते है, जो नगर को क्षेत्र, राज्य एवं देश के विभिन्न भागों से जोड़ते हैं। यह नगर 55 वार्डों में विभक्त है। नगर की कुल जनसंख्या 2,74,917 (2001) एवं घनत्व 6051 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि.मी. है।

 

बिलासपुर नगर को यातायात नगर व न्यायधानी के रूप में विशिश्ट स्थान प्राप्त है। यह एक प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक एवं औद्योगिक केन्द्र है, जिसने जनसंख्या आप्रवास को प्रोत्साहित किया है। प्रस्तुत अध्ययन में नगरोन्मुख जनप्रवास को नगर पदानुक्रम के संदर्भ में उत्प्रेरक के रूप में नियोजित किया जा सकता है।

 

आप्रवास प्रतिरूप

प्रवास एक स्वतंत्र मानवीय प्रक्रिया है। जिसमें मात्र स्थान परिवर्तन नहीं होता, बल्कि यह किसी क्षेत्र के क्षेत्रीय तत्व तथा क्षेत्रीय सम्बंधों को समझने का प्रमुख आधार भी है। (गोसल, 1961)। अस्तु, प्रवास, मृत्यु एवं जन्म की तरह पूर्णतः जैविक घटना नहीं है, यह भौतिक और सामाजिक लेन देन की प्रक्रिया है (जैलिन्स्की 1971)। इस प्रकार प्रवास स्थाई अथवा अस्थाई आवास परिवर्तन में जनसंख्या की गतिशीलता को प्रदर्शित करता है।

 

जन्म स्थान के आधार पर नगर में आप्रवासियों की गणना की गई, जो कि रेवेन्स्टीन (1885) द्वारा प्रतिपादित स्थानान्तरण के नियम के तहत् है।

 

बिलासपुर नगर में चयनित परिवारों (2192) की कुल जनसंख्या 11005 है। जिसमें जन्म स्थान के आधार पर 5619 व्यक्ति (51.06ः) आप्रवासी है। महिला आप्रवासी (52.17ः) का प्रतिशत पुरूश आप्रवासी (47.43ः) से अपेक्षाकृत अधिक है, जिसका कारण वैवाहिक स्थिति में परिवर्तन एवं पारिवारिक गतिशीलता है। नगर के कुल आप्रवास में 50.76ः व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्र से तथा 49.24ः व्यक्ति नगरीय क्षेत्र से प्रवासित हुए। नगरीय क्षेत्रों में पुरूशों का प्रतिशत (53.17ः) महिलाओं से अपेक्षाकृत अधिक रहा। नगरीय क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता एवं स्थानांतरण आप्रवासी पुरूशों में प्रवास का प्रमुख कारण रहा है।

 

नगर में कुल आप्रवास का 18.17ः आप्रवास जिले के अंदर से हुआ, जिसमें बिल्हा विकासखंण्ड (17.04ः) से सबसे अधिक आप्रवास हुए। बिल्हा विकासखण्ड नगर का सबसे समीपस्थ विकासखण्ड है। नगर के कुल आप्रवास का 24.81ः प्रवास छźाीसगढ़ के अन्य जिलों से हुए हंै। जिसमें रायपुर जिले का प्रतिशत (22.88ः) अधिक रहा। भारत के विभिन्न राज्यों से 56.25ः आप्रवास हुए, जिसमें मध्यप्रेदश (21.51ः) एवं पश्चिम बंगाल (20.25ः) से व्यक्ति अधिक आप्रवासित हुए। स्पष्ट है कि जहां मध्यप्रदेश, źाीसगढ़ का पड़ोसी राज्य है, वहीं नगर में दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना से पं. बंगाल के रेलवे परिक्षेत्र से रेलवे कर्मचारियों का स्थानान्तरण बड़ी मात्रा में हुआ। नगर के कुल आप्रवास का 0.50ः आप्रवास विदेशों से हुआ है। कुल विदेशी आप्रवास में 10 व्यक्ति पाकिस्तान 08 व्यक्ति बांगलादेश, 09 व्यक्ति नेपाल एवं 1 व्यक्ति म्यांमार से प्रवासित हुए। (सारणीः1)

 

आप्रवासियों की आर्थिक सहभागिता

किसी क्षेत्र की श्रम शक्ति का निर्माण उन व्यक्तियों से होता है जो विभिन्न आर्थिक कार्यों एवं सेवाओं में कार्यरत होने के योग्य होते हैं। जनसंख्या में उपार्जनकर्ताओं की संख्या, उनकी योग्यता और कुशलता, रोजगार प्राप्ति की नियमितता, उपार्जित धन की मात्रा आदि अनेक ऐसे तत्व है, जो आर्थिक एवं सामाजिक विकास का स्तर निर्धारित करते हैं (बोग, 1969)। नगरीय क्षेत्रों में द्वितीयक एवं तृतीयक कार्य अधिक विकसित होते है, जबकि तृतीयक कार्य आर्थिक सम्पन्नता एवं प्रकृति का द्योतक है (ट्रिवार्था, 1969)। बिलासपुर नगर में द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों की प्रधानता है। जिसमें आप्रवासियों की क्रियाशीलता का विशेष महत्व है।

 

अ. आप्रवासियों में कार्यशील एवं अकार्यशील अनुपात

नगर के विकास में आप्रवासी व्यक्तियों की आर्थिक सहभागिता विशेष महत्व रखती है। नगर में कुल आप्रवासियों में 45.18ः व्यक्ति क्रियाशील हैं, जिसमें पुरूश की क्रियाशीलता (78.85ः) महिलाओं की क्रियाशीलता से (21.15ः) तीन गुना अधिक है, जो महिलाओं की क्रियाशीलता पर परिवार के नकारात्मक दृश्टिकोण का परिणाम है। तुलनात्मक दृश्टि से स्थानीय व्यक्ति (23.93ः) की तुलना में आप्रवासी व्यक्तियों की क्रियाशीलता (45.18ः) अधिक है, जो स्थानीय व्यक्तियों में बाल वर्ग (43.30ः) की अधिकता का प्रतिफल है। इसके विपरीत नगर में कुल आप्रवासियों में 54.82ः व्यक्ति अक्रियाशील है, जबकि स्थानीय व्यक्तियों में इनका प्रतिशत (76.16ः) अधिक है। नगर में अक्रियाशील आप्रवासी में सर्वाधिक आप्रवासी केवल घर गृहस्थी के कार्यों (60.36ः) में संलग्न है, जिनमें महिलाओं का प्रतिशत शत्-प्रतिशत है, जबकि अकार्यशील स्थनीय व्यक्तियों में अध्ययनरत बच्चों का प्रतिशत (61.04ः) अधिक रहा। नगर में आप्रवासियों के स्थानिक प्रतिरूप में अकार्यशील व्यक्तियों में सबसे अधिक प्रतिशत जहाँ भारत के विभिन्न राज्यों से हुए आप्रवासियों (54.58ः) में रहा, वहीं सबसे कम प्रतिशत विदेशों से हुए अप्रवासित व्यक्तियों में

 

ब. क्रियाशीलता का मापन

जनसंख्या के क्षेत्रीय विश्लेशण हेतु जनांकिकी में आर्थिक दृश्टि से सक्रिय जनसंख्या के मापन की प्रमुख विधियों के द्वारा आप्रवासियों की आर्थिक क्रियाशीलता का मापन किया गया है।

 

नगर में अपरिश्कृत क्रियाशील दर 45.18ः है, जबकि स्थानीय व्यक्तियों में यह दर 23.93ः है। नगर में सामान्य क्रियाशील दर 48.84ः है, जबकि स्थानीय व्यक्तियों में यह दर 41.04ः है, जो आप्रवासियों में रोजगार परक आप्रवास (32.62ः) का प्रतिफल है। आप्रवासियों में आयु विशिष्ट क्रियाशील दर 15-29 आयु वर्ग में     (34.27ः) स्थानीय व्यक्तियों (26.73ः) से अधिक रही, जबकि 45-59 आयु वर्ग में स्थानीय व्यक्तियों की क्रियाशीलता (77.96ः) आप्रवासियों की तुलना में (57.63ः) अधिक रही, जो उनके पारिवारिक दायित्व के निर्वहन का प्रतिफल है। नगर में जाति विशिश्ट क्रियाशील दर आप्रवासी व्यक्तियों में जहां अनुसूचित जनजाति (49.47ः) प्राप्त हुआ। वहीं स्थानीय व्यक्तियों में अनुसूचित जाति में इसका प्रतिशत (31.43ः) अधिक रहा, जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की अपेक्षाकृत निम्न आर्थिक स्थिति का प्रतिफल है, जिसमें परिवार के प्रत्येक सदस्य क्रियाशील होते हैं। नगर में आप्रवासी व्यक्तियों में निर्भरता अनुपात 19.48ः है, जबकि स्थानीय व्यक्तियों में यह अनुपात 84.19ः है, जो आप्रवासी व्यक्तियों की तुलना में स्थानीय व्यक्तियों की युवा व्यक्तियों पर बाल एवं वृद्ध वर्ग की अधिक निर्भरता को प्रदर्शित करती है।

 

स. आप्रवासी व्यक्तियों की व्यावसायिक संरचना

व्यावसायिक संरचना किसी क्षेत्र विशेश की जनसंख्या के संरचनात्मक संगठन का घोतक है। जिस पर किसी भी समाज के व्यक्तियों की विभिन्नता का प्रभाव सर्वाधिक होता है (चांदना 1987)। अस्तु, मानव स्थानिक-कालिक संदर्भ में अपने क्रियाकलापों में परिवर्तन व परिमार्जन करता है। (सारणीः3)

 

नगर में क्रियाशील आप्रवासियों की अधिक सहभागिता शासकीय सेवा (35.53ः), दुकान/व्यापार ;16ण्11ः), निजी संस्था (13.23ः) एवं मजदूरी (11.31ः) में रही, वहीं स्थानीय व्यक्तियों की आर्थिक सहभागिता शासकीय सेवा (26.07ः) में आप्रवासियों से अपेक्षाकृत कम पाई गई, किन्तु निजी संस्था (16.83ः) एवं दुकान/व्यापार (21.88ः) में अपेक्षाकृत अधिक रही। आप्रवासी व्यक्तियों के स्थानिक प्रतिरूप में शासकीय सेवा में सबसे अधिक सहभागिता भारत के विभिन्न राज्यों से आप्रवासित व्यक्तियों   (42.54ः) में रही, जबकि बिलासपुर के विभिन्न विकासखण्डों से हुए आप्रवासी व्यक्तियों की सबसे अधिक सहभागिता मजदूरी  (22.27ः) में रही।

 

नगर में कुल कार्यशील आप्रवासियों में 0.67ः बाल श्रमिक एवं 8.86ः वृद्ध श्रमिक है, जबकि स्थानीय व्यक्तियों में इसका प्रतिशत क्रमशः 0.70ः एवं 6.21ः है। बालश्रमिक जहां मजदूरी (52.94ः) में अधिक संलग्न है, वहीं वृद्ध वर्ग सेवानिवृźा कर्मचारी (45.78ः) एवं शासकीय सेवा (16.00ः) में अधिक संलग्न है। नगर में कुल कार्यशील आप्रवासियों में सबसे अधिक सहभागिता 15-59 आयु वर्ग (90.47ः) की है, युवा एवं प्रौढ़ आयु वर्ग (15-59 आयु) की सबसे अधिक सहभागिता आप्रवासियों (37.70ः) एवं स्थानीय व्यक्तियों (27.08ः) दोनों में शासकीय सेवा में रही, जो नगर में रेलवे एवं प्रशासनीक कार्यों में रोजगार की उपलब्धता एवं रोजगार में स्थानान्तरण का प्रतिफल है। लिंगानुसार नगर में कुल क्रियाशील आप्रवासियों में पुरूशों की सहभागिता (78.85ः) महिलाओं (21.15ः) से तीन गुना अधिक है, जबकि स्थानीय व्यक्तियों में पुरूशों की सहभागिता 89.99ः है। आप्रवासी पुरूशों की सबसे अधिक सहभागिता जहाँ शासकीय सेवा (39.12ः) में रही, वहीं महिलाओं की सहभागिता शासकीय सेवा एवं मजूदरी दोनों में (22.16ः) बराबर रही।

 

द. आप्रवासियों का आय स्तर

आप्रवासियों के आय स्तर के निर्धारण में उनके आर्थिक संरचना का प्रभाव विशेश महत्व रखता है। सामान्यतया, निम्न सामाजिक-आर्थिक स्तर, निरक्षर अथवा कम साक्षर, बच्चों एवं महिलाओं का आय स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। (सारणीः4)

 

नगर में कुल क्रियाशील आप्रवासी में क्रमशः 23.48ः व्यक्ति रू. 5,000 से कम, 28.20ः व्यक्ति रू. 5,000 से रू. 10,000 एवं 48.32ः व्यक्ति रू. 10,000 से अधिक मासिक आय प्राप्त करते हैं। तुलनात्मक दृश्टि से रू. 5,000 से कम मासिक आय प्राप्त आप्रवासी व्यक्तियों का प्रतिशत (23.48ः) स्थानीय व्यक्तियों (27.47ः) से कम पाया गया। जबकि रू. 10,000 से अधिक मासिक आय प्राप्त करने वाले आप्रवासी व्यक्तियों का प्रतिशत (48.32ः) स्थानीय व्यक्तियों (32.65ः) से अधिक रहा। नगर में कार्यशील आप्रवासियों के आय स्तर के स्थानिक प्रतिरूप में रू. 5,000 से कम मासिक आय प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में सबसे अधिक प्रतिशत (38.64ः) जहाँ बिलासपुर के विभिन्न विकासखंडों से आप्रवासित व्यक्तियों में रहा, वहीं भारत के विभिन्न राज्यों से आप्रवासित व्यक्तियों में रू. 10,000 से अधिक मासिक आय प्राप्त करने वाले आप्रवासियों का प्रतिशत (83.95ः) अपेक्षाकृत अधिक रहा, जो आप्रवासियों के शैक्षणिक स्तर में भिन्नता का प्रतिफल है।

 

निष्कर्श

प्रवास एक स्वतंत्र मानवीय प्रक्रिया है, जिसके मात्रा एवं दिशा में निर्धारण में राज्य की नीति का अधिक योगदान होता है, अतः इस पर अंकुश लगाना कठिन एवं अनुचित प्रक्रिया होगी, तथापि नगर की जनसंख्या में नियंत्रण एवं आर्थिक समृद्धि के लिए आप्रवास पर नियंत्रण करना एवं प्रवासियों की समस्या के निराकरण के लिए सुनियोजित प्रयास किया जाना, निःसंदेह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

 

संदर्भ सूची

Bouge, D.J. 1969 : Principles of Demography, New York, Johnwilley, pp.213.

Gosal, G.S. 1961 : “Internal Migration in India : A Regional Analysis”, The Indian Geographical Journal. Vol. 36. NO.3, pp. 106-121.

Ravenstein, E.G. 1895: “The Laws of Migration”, Journal of the Royal Statistical Society, Vol. 48, No. 2, pp. 198-199 and 167-227.

Trewartha, G.T. 1969 : A Geography of Population, world Patterns, Johnwilley, New York.

Zelinsky, Willbur, 1966 : A Prologue to population Geography, Prentice Hall, New Zeeland.

चांदना, आर. सी. 1987: जनसंख्या भूगोल, कल्याणी पब्लिशर्स, नई दिल्ली.

 

Received on 04.12.2014

Revised on 17.12.2014

Accepted on 28.12.2014     

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Research J. Humanities and Social Sciences. 5(4): October-December, 2014, 459-465