उत्तरोत्तर विकास की ओर अग्रसर- भिलाई स्टील प्लांट

 

विजय अग्रवाल1] श्रीमती सीमा अग्रवाल2

1विभागाध्यक्ष, वाणिज्य, शा.पे.यो. छ.ग. महा., रायपुर

2सहायक प्राध्यापक, गुरूकुल महिला महाविद्यालय, रायपुर

 

सारांशः

सेल का आरंभ स्वाधीन राष्ट्र के साथ हुआ जो रायपुर से 40 कि.मी. दूर भिलाई जिला दुर्ग में स्थित है। यह इस्पात निर्माण में लगी प्रमुख कंपनी है जो इस्पात के समान में हाट तथा कोल्ड राॅल्ड सीटें काॅयल, जस्ता, चढ़ी सीट, विद्युत सीट, रेल की पटरी, जो देश में यही बनती है। हाल ही में इसने युद्धपोत की प्लेट का भी निर्माण किया है। जिससे भारत में सबसे बड़ा युद्धपोत बनाया गया है। इस्ताप उद्योग में इसकी गणना सर्वश्रेष्ठ संगठनों में की जाती है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की देन है भिलाई स्टील प्लांट जो विकास करते हुए अनेक राष्ट्रीय पुरूस्कारों से सम्मानित होते हुए देश को राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय ऊंचाईयों पर पहुंचा रहा है।

 

पृष्ठभूमि और इतिहासः

सेल का आरम्भ एक स्वाधीन राष्ट्र के उदय के साथ हुआ। स्वाधीनता मिलने के पश्चात राष्ट्र निर्माताओं ने देश के तीव्र औद्योगिकीकरण के लिए आधारभूत सुविधाएं जुटाने की परिकल्पना की। इस्पात क्षेत्र को आर्थिक विकास का साधन माना गया। 19 जनवरी, 1954 को हिन्दुस्तान स्टील प्रा.लि. की स्थापना की गई।

 

नए आयाम (1959-1973)

आरम्भ में हिन्दुस्तान स्टील (एचएसएल) को राउरकेला में लगाए जा रहे एक इस्पात कारखाने का प्रबन्ध करने के लिए गठित किया गया था। भिलाई और दुर्गापुर इस्पात कारखानों के लिए प्राथमिक कार्य लोहे और इस्पात मंत्रालय ने किया था। अप्रैल 1957 में इन दो इस्पात कारखानों का नियंत्रण व कार्य की देखरेख भी हिन्दुस्तान स्टील को सौंप दिया गया। हिन्दुस्तान स्टील का पंजीकृत कार्यालय आरम्भ में नई दिल्ली में था। 1956 में इसे कलकत्ता और 1959 में रांची ले जाया गया।

 

भिलाई और राउरकेला इस्पात कारखानों की दस लाख टन क्षमता का चरण दिसम्बर, 1961 में पूरा किया गया। दुर्गापुर इस्पात कारखाने की दस लाख टन क्षमता का चरण व्हील एवं एक्सल संयंत्र के चालू होने के बाद जनवरी, 1962 में पूरा हुआ। इसके साथ ही हिन्दुस्तान स्टली लिमिटेड की कच्चा इस्पात उत्पादन क्षमता 1 लाख 58 हजार टन (1959-60) से बढ़कर 16 लाख टन हो गई। बोकारो इस्पात कारखाने के निर्माण और परिचालन के लिए जनवरी, 1964 में बोकारी स्टील लिमिटेड के नाम से एक नई कम्पनी का निगमन किया गया। भिलाई इस्पात कारखाने का दूसररा चरण वायर राॅड मिल चालू होने के साथ ही सितम्बर, 1967 में पूरा किया गया। राउरकेला की 18 लाख टन क्षमता की अंतिम यूनिट-टेण्डम मिल फरवरी, 1968 में चालू हुई तथा दुर्गापुर इस्पात कारखाने का 16 लाख टन क्षमता का चरण स्टील मेल्टिंग षाप में भट्टी चालू होने के बाद अगस्त, 1969 मंे पूरा किया गया।

भिलाई में 25 लाख टन, राउरकेला में 18 लाख टन तथा दुर्गापुर में 16 लाख टन के चरण पूरे होने के साथ ही हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड की कुल कच्चा इस्पात उत्पादन क्षमता 1968-69 में बढ़कर 37 लाख टन और 1972-73 में 40 लाख टन हो गई।

 

धारक कम्पनीः

इस्पात तथा खान मंत्रालय ने उद्योग के प्रबंधन के लिए एक नया माॅडल तैयार करने के वास्ते नीतिगत वक्तव्य तैयार किया। 2 दिसम्बर, 1972 को यह नीति वक्तव्य संसद में पेश किया गया। इसके आधार पर कच्चे माल और उत्पादन का कार्य एक ही के अधीन लाने के लिए धारक कम्पनी के सिद्धान्त को आधार बनाया गया। परिणामस्वरूप, स्टील अथाॅरिटी आॅफ इण्डिया लिमिटेड का गठन किया गया। 24 जनवरी, 1973 को निगमित इस कम्पनी की अधिकृत पूंजी 2000 करोड़ रू. थी तथा इसे भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला और बर्नपुर में पांच एकीकृत इस्पात कारखाने तथा दुर्गापुर स्थित मिश्र इस्पात कारखाना और सेलम इस्पात कारखाने के लिए उत्तरदायी बनाया गया। 1978 में सेल का पुनर्गठन किया गया और इसे एक परिचालन कम्पनी बनाया गया।

 

अपने गठन के बाद से ही सेल देश में औद्योगिक विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार करने में सहायक सिद्ध हुई है। इसके अतिरिक्त इसने तकनीकी तथा प्रबंधकीय विशेषज्ञता के विकास में भी महत्वपूर्ण योग दिया है। सेल ने उपभोग करने वाले उद्योगों को निरन्तर कच्चा माल उपलब्ध करा कर आर्थिक विकास की अनेक प्रक्रियाएं प्रारम्भ की हैं।

 

सरकार द्वारा पूर्व मध्यप्रदेश के मैदानी इलाके में 1950 के अन्तिम वर्षों में बसाया गया यह नगर आज छत्तीसगढ़ का एक औद्योगिक केन्द्र व भरा-पूरा नगर है। नगर का केन्द्र बिन्दु भिलाई इस्पात कारखाना है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 40 किमी. पश्चिम में हावड़ा-मुम्बई रेल लाईन तथा ग्रेट इस्टर्न हाईवे पर स्थित।

 

स्टील अथाॅरिटी आॅफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) भारत में इस्पात निर्माण में लगी एक प्रमुख कंपनी है। यह पूर्णतः एकीकृत लोहे और इस्पात का सामान तैयार करती है। कंपनी में घरेलू निर्माण इंजीनियरी, बिजली, रेलवे, मोटरगाड़ी और सुरक्षा उद्योगों तथा निर्यात बाजार में बिक्री के लिए मूल तथा विशेष दोनों तरह के इस्पात तैयार किए जाते हैं। यह कारोबार के हिसाब से देश मंे सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी 10 कम्पनियों में से एक हैं। सेल अनेक प्रकार के इस्पात के सामान का उत्पादन और उनकी बिक्री करती है। इनमें हाॅट तथा कोल्ड रोल्ड शीटें और काॅयल जस्ता चढ़ी शीट, वैद्युत शीट, संरचनाएं, रेलवे उत्पाद, प्लेट बार और राॅड, स्टेनलेस स्टील तथा मिश्र धातु इस्पात शामिल हैं। सेल अपने पांच एकीकृत इस्पात कारखानों और तीन विशेष इस्पात कारखानों में लोहे और इस्पात का उत्पादन करती है। ये कारखाने देश के पूर्वी और केन्द्रीय क्षेत्र में स्थित हैं तथा इनके पास ही कच्चे माल के घरेलू स्त्रोत उपलब्ध हैं। इन स्त्रोतों में कंपनी की लौह अयस्क, चूना-पत्थर और डोलोमाइड खानें शामिल हैं। कंपनी को भारत का दूसरा सबसे बड़ा लौह अयस्क उप्तादक होने का श्रेय भी प्राप्त है। इसके पास देश में दूसरा सबसे बड़ा खानों का जाल है। कंपनी के पास अपने लौह अयस्क, चूना-पत्थर और डोलोमाइट खानें हैं जो इस्पात निर्माण के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल हैं। इससे कंपनी केा प्रतियोगिता में लाभ मिल रहा है।

 

सेल के व्यापक लम्बे तथा सपाट इस्पात उत्पादों की घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। बिक्री का कार्य सेल का अपना केन्द्रीय विपणन संगठन (सीएमओ) करता है। सीएमओ के 4 क्षेत्रों में 37 शाखा कार्यालयों से बिक्री की जाती है। इसके अलावा 25 विभागीय गोदाम, 42 कंसाइनमेंट एजेन्ट, 27 उपभोक्ता सम्पर्क कार्यालय भी संठगठन के बिक्री नेटवर्क के अंश हैं। घरेलू बाजार में बिक्री के केन्द्रीय विपणन संगठन के प्रयासों में ग्रामीण डीलरों का बढ़ता हुआ एक नेटवर्क देश के कोने-कोने में छोटे से छोटे उपभोक्ता की मांग पूरी कर रहा है। इस समय सेल के 2000 से अधिक डीलर हैं। इसका विशाल विपणन तंत्र देश के सभी जिलों में उच्च गुणवत्ता के इस्पात की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है।

 

सेल का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार डिवीजन सीईएसओ 90012000 से प्रमाणित है। इसका कार्यालय नई दिल्ली में है और यह सेल के पांच एकीकृत इस्पात कारखानों से मृदुल इस्पात उत्पादों तथा कच्चे लोहे का निर्यात करता है।

 

गत चार दशक में सेल ने इस्पात निर्माण में तकनीकी तथा प्रबंधकीय विशेषज्ञता प्राप्त की है। सेल परामर्शदात्री डिवीजन (सेलकाॅन), जिसका कार्यालय नई दिल्ली में है, विश्व भर के ग्राहकों को इस विशेषज्ञता का लाभ उपलब्ध करा रहा है।

 

सेल का रांची में एक सुगठित लोहे और इस्पात के लिए अनुसंधान एवं विकास केन्द्र (आरडीसीआईएस) है। यह केन्द्र इस्पात उद्योग के लिए नई तकनीकों के विकास तथा इस्पात की गुणवत्ता में सुधार में मदद दे रहा है। इसके अलावा सेल का एक अपना इंजीनियरी तथा तकनकी केन्द्र (सेट), एक प्रबंध प्रशिक्षण संस्थान (एमटीआई) तथा सुरक्षा संगठन भी है। इनके कार्यालय रांची स्थित हैं। कोलकाता स्थित कच्चा माल डिवीजन हमारी निजी खानों का नियंत्रण करता है। सेल के पर्यावरण प्रबंधन डिवीजन और विकास डिवीजन के मुख्यालय कोलकाता में हैं। हमारे लगभग सभी इस्पात कारखाने और प्रमुख यूनिटें आईएसओ प्रमाणित है।

 

10 बार देश का सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात कारखाने के लिए प्रधानमंत्री ट्राॅफी प्राप्त यह कारखाना राष्ट्र में रेल की पटरियों और भारी इस्पात प्लेटों का एकमात्र निर्माता तथा संरचनाओं का प्रमुख उत्पादक है। देश में 260 मीटर की रेल की सबसे लम्बी पटरियों के एकमात्र सप्लायर, इस कारखाने की वार्षिक उत्पादन क्षमता 31 लाख 53 हजार टन विक्रय इस्पात की है। यह कारखाना चार राॅड तथा मर्चेन्ट उत्पाद जैसे विशेष सामान भी तैयार कर रहा है। भिलाई इस्पात कारखाना आईएसओ 90012000 गुणवत्ता प्रबन्धन प्रणाली से पंजीकृत है। अतः इसके सभी विक्रेय इस्पात आईएसओ की परिधि में आते हैं।

 

भिलाई के कारखाने, इसकी बस्ती और डल्ली खानों को पर्यावरण प्रबन्धन प्रणाली से सम्बन्धित आईएसओ 14001 भी प्राप्त है। यह देश का ऐसा एकमात्र इस्पात कारखाना है जिसे इन सभी क्षेत्रों में प्रमाणपत्र मिला है। कारखाने को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने के लिए एसएः 8000 प्रमाणपत्र और व्यावसायिक स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए ओएचएसएएस- 18001 प्रमाण पत्र भी प्राप्त है। इन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाण पत्रों के कारण भिलाई के उत्पादों का महत्व और भी बढ़ जाता है तथा इस्पात उद्योग में इसकी गणना सर्वश्रेष्ठ संगठनों में की जाती है भिलाई को अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है तथा इसे लगातार तीन वर्ष सीआईआई-आईटीसी सस्टेनेबिलिटी पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

 

चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 मंे सार्वजनिक उपक्रमों में अनिवेश की शुरूआत भारतीय स्पात प्राधिकरण लि. (ै।प्स्) में अनिवेश के जरिए दिसम्बर 2014 में हुई। इस कंपनी के 5 प्रतिशत शेयरों की बिक्री की पेशकश को दुगना से अधिक अभिदान प्राप्त होने का अनुमान है। इस वित्तीय वर्ष में सेल की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी की दो किश्तों में बिक्री के प्रस्ताव केा मंजुरी मोदी मंत्री मण्डल ने सितम्बर 2014 में प्रदान की थी।

 

निष्कर्षः

भिलाई स्टील प्लांट ने स्वाधीनता पश्चात से निरंतर प्रगति की है। सेल ने अन्य उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कर उत्पादन, रोजगार, तकनीकि, निर्यात बाजार, उच्च गुणवत्ता की वस्तु उपलब्ध कर देश के सामाजिक तथा आर्थिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करने में सहायक सिद्ध हुआ है।

 

तीव्र औद्योगिकीकरण के युग में सेल ने स्वयं को सर्वश्रेष्ठ संगठन के रूप में दर्ज कराते हुए निःसंदेह देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

संदर्भ ग्रंथ सूचीः -

1ण् ीजजचेरूूूूण्हववहसमण्बवण्पदध्ेमंतबी घ्

2ण् वार्षिक प्रतिवेदन भिलाई स्टील प्लांट 2013-14

3ण् समाचार पत्र नवभारत

4ण् प्रतियोगिता दर्पण हिन्दी मासिक फरवरी 2015

Received on 16.02.2015

Modified on 11.03.2015

Accepted on 26.03.2015

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Research J. Humanities and Social Sciences. 6(1): January-March, 2015, 50-52