Author(s): सीमा चैबे एवं आभा तिवारी

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DOI: Not Available

Address: सीमा चैबे एवं आभा तिवारी2
1शोध छात्रा हिन्दी, शा.दू.ब.म.स्ना. महाविद्यालय, रायपुर
2प्राध्यापक, हिन्दी, शा.दू.ब.म.स्ना. महाविद्यालय, रायपुर
*Corresponding Author:

Published In:   Volume - 2,      Issue - 1,     Year - 2011


ABSTRACT:
छत्तीसगढ़ के कथाकारों में विभु कुमार जी की अपनी अलग पहचान है। विभु कुमार जी की कहानियों में समाज के विभिन्न वर्गाें के लोगों का, उनकी मनःस्थिति का अथवा समाज में उनकी स्थिति का बड़ा ही सूक्ष्म वर्णन है। अपनी बात वे सीधे सपाट शब्दों में भी कह देते हैं, कभी व्यंग्य का सहारा भी लेते हैं। कहीं पाठकों से सीधे आमने-सामने प्रश्न करते से प्रतीत होते हैं, तो कभी भाव विह्ल कर देते हैं। ”विभु कुमार की कहानियाँ समकालीन जिंदगी में आम आदमी की व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई में आम आदमी की पक्षधरता की कहानियाँ हैं। इन कहानियों में सामान्य जन की तकलीफ उसकी विवशता, निराशा और टूटन का बेबाकी से चित्रण है।“1


Cite this article:
सीमा चैबे एवं आभा तिवारी. विभु कुमार और उनका वस्तु शिल्प. Research J. Humanities and Social Sciences. 2(1): Jan.-Mar. 2011, 19-22.

Cite(Electronic):
सीमा चैबे एवं आभा तिवारी. विभु कुमार और उनका वस्तु शिल्प. Research J. Humanities and Social Sciences. 2(1): Jan.-Mar. 2011, 19-22.   Available on: https://www.rjhssonline.com/AbstractView.aspx?PID=2011-2-1-5


संदर्भ ग्रंथ सूची
1ण्   कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, आवरण से
2ण्   कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, आवरण से
3ण्   कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 8
4ण्   कुमार विभु, कथा संग्रह - माँ तुम कविता नहीं हो, नयी दिल्ली, नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, संस्करण-2003, आवरण से
5ण्   शुक्ल विनोद शंकर, विभु कुमार चयनिका, रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, प्रथम संस्करण-2009, पृ. 65
6ण्   गुप्ता सरोज, स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कहानी में विचार तत्व, दिल्ली, भारतीय कला प्रकाशन, संस्करण-1999, पृ. 237
7ण्   कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 9
8ण्   मेंहदी रत्ता कांता (अरोड़ा), हिन्दी कहानी का मूल्यांकन, नई दिल्ली, राधाकृष्ण प्रकाशन, संस्करण-1994, पृ. 20
9ण्   कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 21
10ण्  कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 98
11ण्  कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 26
12ण्  कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 31
13ण्  कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, वाणी प्रकाशन, दिल्ली, प्रथम संस्करण, 1978, पृ. 48
14ण्  कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 11
15ण्  कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 22
16ण्  कुमार विभु, कथा संग्रह - मेरे साथ यही तो दिक्कत है, दिल्ली, वाणी प्रकाशन, प्रथम संस्करण-1978, पृ. 8

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